जब तीन मुख्यमंत्री बैठे साथ साथ... और दूरियों को जला दिया....

सम्पादकीय / जब तीन मुख्यमंत्री बैठे साथ साथ... और दूरियों को जला दिया..../ छत्तीसगढ़ में अभी राजनीतिक माहौल पंद्रह साल बाद बदला है और हालात ये हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह वर्तमान सरकार की जांच को बदलापुर कह रहे हैं. नये मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी अपने तेवर में हैं और आए दिन कुछ ना कुछ बड़ी खबर पिछले सरकार के कार्यों को लेकर निकल रही है. अग्रिम जमानत की याचिकाओं की संख्या बढ़ती जा रही है और वे उसी तेजी से खारिज भी हो रही हैं. वक्त बदल गया है और हर बार की तरह सिकंदर समय ही है, व्यक्ति नहीं. ऐसे समय में हरिभूमि समाचार पत्र और आईएनएच के कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के तीनों मुख्यमंत्री को एक मंच पर लाने के लिये राजी कर पाना यह कार्य सिर्फ हमारे मित्र डॉ. हिमांशु द्विवेदी ही कर सकते थे. कार्यक्रम 7 फरवरी को था और उसी दिन डॉ. रमन सिंह के दामाद की अग्रिम याचिका खारिज हुई और एक दो दिन पहले ही उन्होंने अपनी नौकरी भी छोड़ी. कार्यक्रम को लेकर लोगों में इतना कौतुहल था कि हर किसी की जबान में यह था कि तीनों मुख्यमंत्री एक साथ आयेंगे या नहीं. भूपेश बघेल ने इसके पहले कभी डॉ. रमन सिंह के साथ कोई कार्यक्रम नहीं किया था. वे कभी एक मंच पर नहीं दिखे थे. इस गर्म माहौल में सकारात्मकता और सौहार्द वाले कार्यक्रम को लेकर संदेह स्वाभाविक था. लेकिन लोगों के संदेह को धता बताते हुये तीनों अतिथियां का आगमन हुआ और उनके परस्पर ठहाके भी लगे. हास्यबोध के धनी अजीत जोगी ने अपने भाषण में कहा कि उन्हें भूत शब्द से बहुत ऐतराज है. संचालक उन्हें भूतपूर्व मुख्यमंत्री कह कर संबोधित कर रहे थे और ऐसा आम तौर पर कहा ही जाता है. उन्होंने कहा कि भूत और भूतपूर्व दोनों शब्द उनके लिये ठीक नहीं हैं और उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम मुख्यमंत्री कह कर ही संबोधित किया जाये. भूत वाली बात उन्होंने इतने अच्छे ढंग से कही थी कि पूरा प्रांगण खिलखिला उठा. उसके बाद उन्होंने कहा कि जब वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सबसे पहले दीप प्रज्वलित किया तो मैंने पूछा - जला दिया !! और उस बात पर ठहाके लगे और भूपेश बघेल ने कहा कि नहीं उन्होंने सिर्फ दीप प्रज्वलित किया है. उनके बाद आए डॉ रमन सिंह ने अपने उद्बोधन में अजीत जोगी को प्रथम मुख्यमंत्री कह कर संबोधित किया तो फिर ठहाके लगे. अब बारी थी भूपेश बघेल की और उन्होंने भी अपनी वाकपटुता का प्रदर्शन किया. उन्होंने अपने उद्बोधन में अजीत जोगी को प्रथम मुख्यमंत्री कहा तो लोग मुस्कुराये, फिर उन्होंने डॉ. रमन सिंह के लिये कहा कि वे प्रदेश के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं तो फिर ठहाके लगे. उन्होंने प्रथम शब्द की गरिमा को और महिमा मंडित कर दिया था. उसके बाद उन्होंने जोगी जी के संक्षिप्त वाक्य - जला दिया की विवेचना प्रारंभ की तो माहौल फिर खुशनुमा हो गया. उन्होंने कहा कि उनके मुख्यमंत्री बनने से किसका क्या क्या जला है यह बताने की आवश्यकता नहीं है, फिर ठहाके गूंज उठे. डॉ. हिमांशु द्विवेदी के इस प्रयास की सराहना सभी गणमान्य लोगों ने की. पत्रकार आम तौर पर नकारात्मकता को देखने के लिये जाने जाते हैं और जला दिया एक नकारात्मक शब्द ही माना जायेगा. डॉ. हिमांशु ने इसे भी सकारात्मक मोड़ दे दिया और कहा जला दिया...दूरियों को !! ऐसी सकारात्मकता की आज प्रदेश, देश और विश्व को भी दरकार है जो युद्ध के मुहाने में बैठा है. सरप्राइज सम्मान - मैं इस कार्यक्रम में एक मित्र की तरह ही आमंत्रित था और मुझे इस बात का अनुमान था कि मुझे अतिथियों के स्वागत वाली लिस्ट में शायद जोड़ लिया जायेगा, जैसा कि आमतौर में कार्यक्रमों में होता है. लेकिन यहां भी डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने अपना नया अंदाज दिखाया और अचानक मुझे सम्मान के लिये मंच पर आमंत्रित किया गया. प्रदेश के तीनों मुख्यमंत्री प्रथम, प्रथम निर्वाचित और नव निर्वाचित के हाथों मेरा सम्मान किया गया. भूपेश बघेल जी ने शॉल गले में डाली और डॉ. रमन सिंह ने श्रीफल प्रदान किया, जोगी जी ने हाथ मिलाकर बधाई दी. जब मैंने लोगां को बताया कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी तो लोगांं को विश्वास नहीं हुआ कि ऐसा सरप्राइज सम्मान भी होता है. कार्यक्रम में मैं अकेला गया था इससे लोगों को भरोसा हुआ क्योंकि पूर्व नियोजित होता तो परिवार को भी साथ जरूर लाता. - ़त्रयम्बक शर्मा